ईपत्रकार.कॉम – इस्लामिक विद्वानों के मुताबिक यह तिथि चांद के दीदार पर निर्भर करती है। उनके अनुसार यदि 4 मई की शाम को चांद का दीदार होता है तो मुकद्दस रमजान की शुरूआत मानी जाएगी। ऐसा होने पर 4 मई की रात को सहरी के बाद से रोजा शुरू हो जाएगा। वहीं, चांद का दीदार 4 की बजाय 5 मई को होता है तो रमजान माह शुरूआत एक दिन आगे बढ़ जाएगी और पहले रोजे की सहरी 5 मई की रात को की जाएगी। जानकारों के मुताबिक सहरी का वक्त सुबह 4 बजे के आसपास और इफ्तार का वक्त शाम 7 बजे के आसपास रहेगा। हालांकि यह समय अलग अलग जगह के हिसाब से बदल भी सकता है।
इस्लामिक विद्वानों के मुताबिक रमजान को सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस दौरान हर मोमिन पर रोजा रखना, पांच वक्त की नमाज अदा करना, खैरात और जकात देना फर्ज होता है। इस दौरान किसी तरह के गलत कामों पर पूरी तरह से पाबंदी होती है। विद्वान मानते हैं कि इस दौरान सभी बुरी आदतों को छोड़ना होता है और दीन के रास्ते पर चलना होता है। इस माह में अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं।





























































