नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी गुरुवार को दिल्ली में विज्ञान भवन में आयोजित की गई. नेशनल अवॉर्ड के लिए 131 कलाकारों को विजेता चुना गया था. लेकिन राष्ट्रपति ने सिर्फ 11 को ही अपने हाथों से ये सम्मान दिया. इस पर तमाम सेलेब्रिटीज ने विरोध दर्ज कराया. 131 में से 120 विजेताओं ने फिल्म फेस्टिवल के एडिशनल डायरेक्टर जनरल चैतन्य प्रसाद और राष्ट्रपति कार्यालय को लिखा कि वे अवॉर्ड सेरेमनी में भाग नहीं लेंगे. 68 विजेताओं ने बैठक कर अवॉर्ड लेने से इंकार कर दिया.
ऑस्कर विजेता साउंड डिजाइनर रेसुल पुकुट्टी ने इस मामले में नाराजगी जताई है. उन्होंने फेसबुक पर एक लंबा पोस्ट लिखा है. इसमें उन्होंने लिखा, “यह भारतीय फिल्म उद्योग में काम करने वाले एक सामान्य तकनीशियन की भावनाएं हैं. माननीय राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय समारोह में अपने भाषण में कहा कि ‘यह वाकई 125 पुरस्कार विजेताओं में से हर एक के लिए एक विशेष क्षण है’ मुझे नहीं पता कि यह उन सभी के लिए विशेष था, लेकिन मुझे भरोसा है कि यह उनमें से कुछ के लिए ही विशेष था. माननीय राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि फिल्म उद्योग में 2लाख लोग सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहे हैं.
हां, ये सही है, कल जो लोग समारोह से अनुपस्थित रहे, उनमें ज्यादातर इन्हीं 2 लाख लोगों में शामिल हैं. वे कैमरे के पीछे काम करते हैं. भारी लाइट्स लादते हैं, उनके कंधों पर भारी उपकरण होते हैं. मुझे इसलिए बुरा लगा क्योंकि जब आपके अच्छे ऑफिस ने सूची में 11 लोगों को चुना, जो कि सिर्फ स्टार थे. आपने स्टार एलेमेंट्स को चुना. या 11 लोग, युवा और पहली बार पुरस्कार विजेता हो सकते हैं? हमें बुरा लगा, जो लोग बाहर हुए वे कमजोर तकनीशियन थे, जिन्हें हमेशा हर पुरस्कार समारोह में पहले बुलाया और और हर टीवी शो में बाहर कर दिया गया.
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पुकुट्टी ने ट्वीट कर कहा, अगर भारत सरकार हमारे सम्मान में अपना तीन घंटे का समय भी नहीं दे सकती तो उन्हें हमें राष्ट्रीय पुरस्कार देने की जहमत नहीं उठानी चाहिए. हमारे 50 फीसदी से ज्यादा पसीने की कमाई आप मनोरंजन कर के रूप में ले लेते हैं, हमारी जो प्रतिष्ठा है कम से कम उसका तो सम्मान कीजिए.






























































