होशंगाबाद – ईपत्रकार.कॉम |आदिगुरू शंकराचार्य के 108 फीट की अष्टधातु की प्रतिमा के निर्माण के लिए एकात्म यात्रा निकाली गई थी। एकात्म यात्रा का आज जिले में अंतिम दिन था। आज एकात्म यात्रा सिवनीमालवा के ग्राम पगढ़ाल से ओमकारेश्वर के लिए रवाना हुई। एकात्म यात्रा आज प्रात: सिवनीमालवा से भरलाय पहुंची भरलाय में एकात्म यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। भरलाय के पश्चात एकात्म यात्रा रावनपीपल होती हुई पगढ़ाल पहुंची। ग्राम पगढ़ाल में जनसंवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि आज का मनुष्य माया के बंधन में बंधकर मोहित हो रहा है। हम सबको मानव जीवन मोह माया के बंधनों से छूटने के लिए मिला है। किंतु मनुष्य न चाहते हुए भी मोह माया के बंधन में बंध जाता है। मनुष्य को सांसारिक मोह ज्यादा होता है। जैसे मेरा घर, सम्पत्ति, धन इत्यादि। महामण्डलेश्वर ने कहा कि भारत वर्ष एक बार पुन: आध्यात्मिक उन्नति के ओर जाएगा। ओमकारेश्वर में 108 फीट की जो प्रतिमा बनाई जाएगी। उसको हम सब नमन करेंगे। ओमकारेश्वर में प्राच्य विद्या का केन्द्र बनाया जाएगा। महामण्डलेश्वर ने कहा कि नवोदित पीढ़ी को जो हम ज्ञान के बीज दे रहे हैं आने वाले समय में यह पीढ़ी चमत्कार कर दिखाएगी। उन्होंने कहा कि माता सीता के लिए भी लक्ष्मण रेखा खींची गई थी। हमारी लोभ, क्रोध और मोह की वृत्ति हमारी ज्ञान का अपहरण करा देती है इसलिए हर मनुष्य को हमेशा जागृत रहना चाहिए। उन्होने सीता हरण एवं विष्णु के मोहनी रूप का विस्तार से वर्णन किया।
इसके पूर्व एकात्म यात्रा जब पगढ़ाल पहुंची तो ग्राम के सरपंच ने चरणपादुका को सर पर धारण किया। महामण्डलेश्वर ने चरणपादुका, ध्वज एवं कन्या पूजन पूरे वैदिक मंत्रोचार के बीच कराये। यात्रा के समन्वयक श्री शिव चौबे ने पगढ़ाल के लोगों की आत्मीयता को स्मरण करते हुए कहा कि पगढ़ाल के निवासियों के आत्मीय संबंध उनके मन में बसा है।
एकात्म यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर रवाना होने के लिए पगढ़ाल से जब ओमकारेश्वर के लिए रवाना हुई तो पगढ़ाल के ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों से एवं नर्मदाष्टक का गान कर एकात्म यात्रा को आत्मीय एवं भव्य विदाई दी।





























































