कर्नाटक विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद से शुरू हुआ राज्य में सत्ता का घमासान शनिवार को अपने अंजाम तक पहुंच जाएगा। शाम 4 बजे येदियुरप्पा सरकार के बहुमत परीक्षण के बाद इतने दिनों से चल रही राजनीतिक सरगर्मी जरूर कुछ कम होगी। उधर बहुमत परीक्षण से पहले कर्नाटक के मंगलौर में ऐहतियातन धारा 144 लगा दी गई है
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्पा को शनिवार शाम 4 बजे तक बहुमत साबित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश कांग्रेस और जेडीएस द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर चली लंबी बहस के बाद दिया है। दोनों पार्टियां कर्नाटक के राज्यपाल वाजूभाई वाला के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थीं, जिसमें उन्होंने बीजेपी को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का आमंत्रण दिया था।
गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम में बीजेपी 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी, मगर बहुमत के आंकड़े (112 सीट) से दूर रह गई। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन कर लिया और दोनों ने अपने कुल 115 विधायकों के समर्थन के दम पर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है।
उधर कर्नाटक के गवर्नर द्वारा बीजेपी विधायक केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने को कांग्रेस ने संविधान के खिलाफ बताया है। कांग्रेस बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ऑफिस में बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाने के खिलाफ सुनवाई की मांग की है। कांग्रेस के वकील देवदत्त कामत ने बताया कि कांग्रेस और जेडीएस ने केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाना पूरी तरह संविधान के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए शनिवार सुबह 10:30 बजे का समय तय किया है।
प्रोटेम स्पीकर पर इसलिए है कांग्रेस को ऐतराज
सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि नियुक्ति को खारिज किया जाए और संसदीय परंपरा के तहत सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाए। कांग्रेस ने आशंका जाहिर की है कि अयोग्य सदस्य को भी बहाल कराया जा सकता है, जबकि प्रोटेम स्पीकर सिर्फ शपथ दिला सकता है और फ्लोर टेस्ट करा सकता है। कांग्रेस का कहना है कि नियमों के मुताबिक, सबसे सीनियर सदस्य को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है, लेकिन गवर्नर ने बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाकर नियमों का उल्लंघन किया है। कांग्रेस का कहना है कि क्योंकि सबसे वरिष्ठ विधायक (आरवी देशपांडे) उनकी पार्टी से आते हैं, इसलिए उन्हें नजर अंदाज कर बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है।
बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में शनिवार को होने वाले बहुमत परीक्षण के लिए गवर्नर ने प्रोटेम स्पीकर के तौर पर बीजेपी एमएलए केजी बोपैया को नियुक्त किया गया है। इससे पहले कांग्रेस विधायक आरवी देशपांडे और बीजेपी के उमेश कट्टी का नाम इसके लिए सबसे आगे चल रहा था।





























































