देवास – ईपत्रकार.कॉम |राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने किसानों से चर्चा करते हुए कहा कि किसान परंपरागत खेती से जैविक खेती की ओर बढ़े। रासायनों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी पर दुष्प्रभाव के साथ उत्पादन भी प्रभावित होने लगा है। उन्होंने कहा कि किसान परंपरागत खेती से धीरे-धीरे निकले और जैविक खेती को अपनाएं। केंद्र और राज्य सरकार भी जैविक उत्पादों के अच्छे मूल्य दिलाने के लिए प्रयास कर रही है। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल शुक्रवार को देवास जिले में सोनकच्छ तहसील के ग्राम अरनिया जागीर में किसानों से चर्चा कर रही थी। इस अवसर पर उन्होंने प्रगतिशील कृषक नारायणसिंह के फार्म पर आधुनिक पद्धतियों से की जा रही संरक्षित एवं जैविक खेती का अवलोकन किया तथा दूसरे किसानों को भी इससे प्रेरणा लेकर जैविक खेती अपनाने का आग्रह किया।
राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि किसान रासायनिक उर्वरकों का कम से कम उपयोग करें। मिट्टी का परीक्षण कराकर जिन तत्वों की आवश्यकता खेत की मिट्टी को है केवल उन्हीं उर्वरकों को जरूरत अनुसार उपयोग करें। उन्होंने किसानों को रसायनों का असंतुलित उपयोग से बचने की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसान बीज की सही मात्रा का उपयोग करें और पौधों से पौधों तथा कतारों के बीच की दूरी पर्याप्त रखें जिससे पौधों को वृद्धि हेतु पर्याप्त जगह मिल सके। पौधे स्वस्थ्य होंगे तो पैदावार अच्छी होगी।
राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि एक किसान को व्यापारी की भांति भी सोचना चाहिए और अपने खेती का हर साल का हिसाब किताब भी रखना चाहिए। उन्होंने किसानों से इस हेतु वार्षिक रजिस्टर बनाने का आग्रह किया और कहा कि रजिस्टर रखने से किसान सही मायने में फसल से होने वाले नुकसान या फायदे के संबंध में जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि अक्सर क्षेत्र विशेष के सभी किसान देखा-देखी में एक ही फसल सभी खेतों में बोते हैं जिससे फसल विशेष की अधिक पैदावार होने से फसल के अच्छे दाम नहीं मिलते। यदि किसान भिन्न-भिन्न फसलें बोये तो यह स्थिति नहीं बनेगी और किसानों को अच्छे दाम मिल सकेंगे।
राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने किसानों से वन-टू-वन चर्चा की तथा खेती के संबंध में उनके अनुभव सुने। प्रगति शील किसान श्री नारायण सिंह ने बताया कि उसके पास 62 एकड़ जमीन है। उन्होंने बताया कि वह प्रतिवर्ष एक एकड़ खेती में 2 लाख रुपए की आय मौसमी सब्जियों मिर्च, टमाटर, बैंगन, लौकी, करेला, खीरा आदि से प्राप्त करते हैं, इसमें से प्रति एकड़ 70 हजार रुपए लागत आती है और एक लाख 30 हजार रुपए का मुनाफा प्रति एकड़ हो जाता है। उन्होंने बताया कि वह फसलों में ड्रिप पद्धित से सिंचाई करते हैं तथा जैविक उर्वरकों व कीटनाशकों का उपयोग करते है। पॉली हाउस में सब्जियां व नर्सरी लगाते है इससे भी बड़ी आय हो जाती है। किसान नारायण सिंह ने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई संयंत्र को भी दिखाया तथा ड्रिप सिंचाई के फायदे से अवगत कराया। उनहोंने गौमुत्र, गोबर, छाछ, डिम्पोजर आदि से जैविक कीटनाशक तैयार करने के संबंध में भी अवगत कराया।
किसान धरमपाल सिंह ठाकुर ने बताया कि परंपरागत खेती से जहां उन्हें 40-50 हजार रुपए प्रतिवर्ष की आय होती थी, वहीं उद्यानिकी विभाग के अनुदान से पॉली हाउस निर्माण कराया और अब गुलाब के फूलों की खेती से प्रतिवर्ष 5-7 लाख रुपए की आय हो रही है। किसान प्रकाश सिहं ठाकुर ने बताया कि वे अपने दो हेक्टेयर के फॉर्म पर कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र बताई गई आधुनिक तकनीकों व रिज्ड बेड पद्धति से खेती करते हैं, जिसके कारण चना की फसल की खेती में 38 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन मिला। किसान ओमप्रकाश पटेल, अमरसिंह तंवर,लक्ष्मीनारायण आदि ने भी नवीन तकनीकों व परपंरागत खेती के स्थान पर जैविक खेती को अपनाया। लागत घटने व फायदा बढ़ने के संबंध में अवगत कराया।
जामगोद में सोलर पंप का किया अवलोकन
राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने ग्राम जामगोद में राहुल पिता मुरारीलाल के खेत में सोलर पंप का अवलोकन किया। इस दौरान हितग्राही ने बताया कि यह सोलर पंप मप्र ऊर्जा विकास निगम में सब्सीडी से लगाया गया है। ऊर्जा विकास निगम द्वारा 85 प्रतिशत सब्सीडी दी गई है। उन्हें केवल 72 हजार रुपए खर्च करने पड़े। अधिकारियों ने राज्यपाल महोदया को बताया कि देवास जिले में सोलर पंप स्थापना के मामले में किसानों द्वारा बहुत रूचि दिखाई गई है और प्रदेश में सबसे अधिक सोलर पंप देवास जिले में स्थापित किए गए हैं।
इस अवसर पर विधायक सोनकच्छ श्री राजेंद्र वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह राजपूत, कलेक्टर डॉ. श्रीकांत पांडेय, पुलिस अधीक्षक अंशुमानिंसह, सीईओ जिला पंचायत राजीव रंजन मीणा, डीएफओ एमआर बघेल, एसडीएम सोनकच्छ नीता राठौर, उपसंचालक कृषि एसएस राजपूत, उपसंचालक उद्यानिकी नीरज सांवलिया, नंदकिशोर पाटीदार अन्य जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।





























































