नई-दिल्ली(ई-पत्रकार.कॉम) | सरकार ने आज घोषणा की कि भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए उसमें बड़ा सुधार किया जाएगा। इस सुधार में तकरीबन 57000 अधिकारियों और अन्य की फिर से तैनाती के साथ-साथ संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना शामिल है। रक्षा मंत्री अरुण जेतली ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद शायद पहली बार सेना में इस तरह की बड़ी और ‘दूरगामी प्रभाव’ वाली सुधार प्रक्रिया शुरू की जा रही है।युद्धक क्षमता बढ़ाने के अलावा समिति को रक्षा खर्च में संतुलन कायम करने के लिए भी सुझाव देना था। इसके लिए समिति ने संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की अनुशंसा की है। इन सिफारिशों पर 31 दिसंबर, 2019 से अमल किया जाएगा।
रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को यहां केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब सेना में अत्यंत दूरगामी प्रभाव वाली बड़ी सुधार प्रक्रिया शुरू की गई है। जब उनसे यह पूछा गया कि कहीं यह कदम दोकलम विवाद के मद्देनजर तो नहीं उठाया गया है, रक्षा मंत्री ने कहा कि सुधार की प्रक्रिया किसी घटना विशेष के कारण नहीं शुरू की गई है।
डोकलाम के पहले से ही इसकी तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को ही समिति की सिफारिशों को मंजूर कर लिया था। बुधवार को इसके बारे में केंद्रीय मंत्रिमंडल को जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि सुधार के पहले चरण में 57 हजार सैन्य अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों (जेसीओ) एवं अन्य रैंक के कर्मियों एवं असैन्य कर्मियों को फिर से तैनाती दी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि 32 हजार असैन्य कर्मियों को फिर से तैनात किया जाएगा। इसके बाद सिग्नल कोर में सुधार किया जाएगा।
इसके बाद सैन्य फार्मों, आर्मी पोस्टल प्रतिष्ठान और बेस वर्कशॉप को बंद करने जैसे कदम उठाए जाएंगे। सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी ने 39 फार्मों को बंद करने का फैसला कर लिया है। इन्हें समयबद्ध कार्यक्रम के तहत बंद किया जा रहा है।
सप्लाई एवं परिवहन सुविधाओं में सुधार संबंधी सिफारिशों भी लागू किया जाएगा। क्लर्क स्टाफ और ड्राइवरों की नियुक्ति के मानक कड़े किए जाएंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय कैडेट कोर की क्षमता बढ़ाने के उपाय किए जाएंगे।





























































