नई दिल्ली : खादी विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन (केवीआईसी) के सालाना कैलेंडर और टेबल डायरी में इस साल चरखा वही होगा लेकिन महात्मा गांधी की जगह पीएम मोदी नजर आएंगे। सूत्रों की मानें तो नए कैलेंडर और डायरी में चरखे के साथ बापू सरीखा पोज देते मोदी को देखकर केवीआईसी के अधिकारी और कर्मचारी हैरान हैं। धोती पहनकर चरखा कातते हुए गांधीजी की ये तस्वीर भारत के जनमानस में दशकों से बसी है। हालांकि मोदी धोती की जगह ट्रेडमार्क कुर्ते-पजामे और जैकेट में नजर आए हैं। जिस चरखे पर वो सूत कात रहे हैं वो भी थोड़ा आधुनिक है। केवीआईसी के कई कर्मचारी इसे राष्ट्रपिता का अपमान मान रहे हैं और उनमें से कुछ लंच टाइम के दौरान मुंह पर काली पट्टी बांधे दिखे।
मोदी भी खादी के प्रतीक
हालांकि केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना का कहना है कि मोदी की इस तस्वीर में कुछ भी गलत नहीं है और गांधीजी की इस मशहूर तस्वीर में पहली बार बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पूरा खादी उद्योग गांधीजी के आदर्शों पर आधारित है इसलिए उन्हें नजरअंदाज करने का सवाल नहीं उठता। मोदी भी लंबे वक्त से खादी पहनते आ रहे हैं और इसे देश-विदेश में लोकप्रिय बनाने में उनका भी योगदान है। सक्सेना के मुताबिक मोदी खादी के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसेडर हैं। केवीआईसी का मकसद गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है और मोदी का ‘मेक इन इंडिया’ का ख्वाब इस अवधारणा से मेल खाता है।
‘आदर्शों से समझौता’
दूसरी ओर केवीआईसीके एक कर्मचारी ने कहा कि वो गांधीजी के विचारों के साथ साल दर साल हो रहे समझौते से आहत हैं। पिछले साल भी प्रधानमंत्री के फोटो को कैलेंडर में जगह दी गई थी। इस कर्मचारी ने बताया कि वर्ष 2016 में केवीआईसी की कर्मचारी यूनियनों ने इस मसले को जोर-शोर से उठाया था। उस वक्त मैनेजमेंट ने भरोसा दिलाया था कि गांधीजी की इस तस्वीर के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।





























































