मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के दौरान शिप्रा संरक्षण का अदभुत अभियान चलाया गया। यह अभियान लगातार चलाया जाये, तभी शिप्रा मैया बचेगी। हम सबको मिलकर यह प्रयास करना चाहिये। शिप्रा किनारे पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाये। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात आज उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं शिप्रा सेवा यात्रा के समापन अवसर पर रामघाट पर आयोजित समारोह में कही।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि औद्योगिक क्रान्ति के बाद धरती का तापक्रम निरन्तर बढ़ता जा रहा है। मालवा को किसी समय ‘डग डग रोटी, पग-पग नीर’ वाला क्षेत्र माना जाता था, किन्तु भूजल नीचे जाने से मालवा रेगिस्तान की ओर बढ़ रहा है। सरकार ने सबसे पहले नर्मदा-शिप्रा मिलन का काम हाथ में लिया और इसको रिकार्ड समय में पूर्ण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ में उज्जैन शहर एवं शिप्रा तट पर स्थाई प्रकृति के अनेक काम हुए हैं, फिर भी यदि आवश्यकता होगी तो नये काम किये जायेंगे, जिनमें घाट निर्माण भी शामिल है।
उज्जैन जिले के किसानों को 775 करोड़ रूपये का लाभ पहुंचाया
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनकी सरकार किसान हितैषी सरकार है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि पहले सोयाबीन की फसल नष्ट होने पर किसानों के हाथ कुछ नहीं आता था, किन्तु पिछले वर्ष में प्रदेश सरकार ने उज्जैन जिले के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा एवं मुआवजे के तौर पर कुल 775 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की है।
शिप्रा तीर्थ यात्रा के संयोजक एवं विधायक डॉ.मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन की पहचान शिप्रा नदी से है। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, सांसद प्रो.चिन्तामणि मालवीय, विधायक श्री दिलीपसिंह शेखावत, श्री अनिल फिरोजिया, श्री बहादुरसिंह चौहान, श्री सतीश मालवीय, श्री मुकेश पण्ड्या, जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय, महापौर श्रीमती मीना जोनवाल, यूडीए अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, शिप्रा सेवा यात्रा के पं.रामेश्वरदास, सर्वश्री इकबालसिंह गांधी, श्याम बंसल, अनिल जैन कालूहेड़ा, संभागायुक्त श्री एमबी ओझा, आईजी श्री राकेश गुप्ता, कलेक्टर श्री संकेत भोंडवे मौजूद थे।



































































