हाफिज ने PAK आर्मी चीफ से कहा- जम्मू-कश्मीर भेजो सेना, पूरा करो जिन्ना का आदेश

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जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद ने एक बार फिर भारत के खि‍लाफ जहर उगला है. कराची में डिफेंस काउंसिल की मीटिंग में मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ से कहा कि वो कश्मीर में न सिर्फ सेना भेजें, बल्कि‍ मोहम्मद अली जिन्ना के लंबित आदेश का पालन करें.

हिंदुस्तान के खि‍लाफ बेसुरा राग अलापते हुए आतंकी संगठन लश्कर के संस्थापक ने सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ से कहा, ‘पाकिस्तान के संस्थापक एमए जिन्ना के लंबित आदेश का पालन करें और कश्मीर में सैनिक भेजें.’

‘विभाजन के वक्त पाकिस्तान में रहना चाहते थे कश्मीरी’
रविवार को ‘डिफेंस काउंसिल ऑफ पाकिस्तान’ के बैनर तले एक रैली को संबोधित करते हुए सईद ने दावा किया, ‘कश्मीरियों ने विभाजन से पहले घोषणा की थी कि वे पाकिस्तान के साथ रहना चाहते हैं. लेकिन विभाजन के बाद भारत ने जबरन जम्मू-कश्मीर में सेना भेज दी. इस पर कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने कमांडर इन चीफ को सैनिक भेजकर जवाब देने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने आदेश मानने से इनकार कर दिया.’

‘भारत से लड़ाई नहीं, लेकिन रणनीति जरूरी’
हाफिज सईद ने आगे कहा, ‘अब मैं जनरल राहिल शरीफ से जम्मू-कश्मीर में सैनिक भेजने की अपील करता हूं, क्योंकि कायदे आजम का वो आदेश लंबित है.’ सईद ने कहा कि वह भारत के साथ लड़ाई करने को नहीं कह रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और राहिल शरीफ को कश्मीर मुद्दे पर निश्चय ही रणनीति बनानी चाहिए.

‘मोदी को जवाब क्यों नहीं देते नवाज शरीफ?’
हाफिज सईद ने अपना राग अलापते हुए कहा, ‘पाकिस्तान युद्धक्षेत्र बन गया है और निर्दोष कश्मीरी मारे जा रहे हैं, जबकि नरेंद्र मोदी बलूचिस्तान को अलग करने की बात कर रहे हैं. हमारे प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं और वह उसी शैली में मोदी को जवाब देने में अनिच्छुक क्यों हैं?’ उसने कहा कि शरीफ को चकोठी तक राहत सामग्री भेजनी चाहिए ताकि कश्मीरियों को यकीन हो कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री उनके साथ हैं.

चकोठी में धरने पर बैठा था हाफिज का बेटा
बता दें कि हाफिज सईद आतंकी संगठन लश्कर का संस्थापक है और उस पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित है. पिछले दिनों सईद के बेटे तल्हा सईद की अगुवाई में जमात-उद-दवा का एक कारवां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के चकोठी में नियंत्रण रेखा पर धरना पर बैठा था. उसने मांग की कि भारत कश्मीरियों के लिए उनके द्वारा लाई गई राहत सामग्री स्वीकार करे.

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