एक कदम घूरा रहित गांव की ओर- कृषि विज्ञान केन्द्र बड़गांव की पहल

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बालाघाट- (ईपत्रकार.कॉम) |राणा हनुमान सिंह कृषि विज्ञान केन्द्र बड़गांव,बालाघाट द्वारा प्रधानमंत्री के संकल्प स्वच्छता से सिद्धि के अंतर्गत अंगीकृत ग्राम ऑवलाझरी में कम्पोस्ट खाद बनाने के विधि की सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी किसानो को सिखायी गई। कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एल. राऊत द्वारा गांव में घूरा (कचरा डालने का स्थान) से होने वाले कृषि एवं मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव की विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।

डॉ. राउत ने बताया कि हमारे ग्रामीण किसान भाई हम अपने गांव में रास्तों के किनारो पर कचरो का ढेर लगा देते है, जिसमें गोबर एवं सभी प्रकार का कचरा वर्ष भर डालते है। इस कचरे को गर्मी के मौसम में फसल बुवाई के पहले खेतो में गोबर की खाद के रूप में उपयोग करते है। इसके उपयोग के पश्चात यह देखा गया है कि उन खेतो में अन्य खेतो की तुलना में बहुत अधिक खरपतवार निकलता है। प्रयोगो द्वारा यह पाया गया है कि घूरे वाली खाद के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि के स्थान पर फसल लागत में वृद्धि पायी गई एवं कीट, बीमारियों का प्रकोप भी इन खेतो में सामान्यतः अधिक पाया गया है। इसी प्रमुख तथ्य को ध्यान में रखते हुये कृषि विज्ञान केन्द्र बालाघाट के वैज्ञानिको ने संकल्प लिया कि ग्राम ऑवलाझरी से घूरा रहित गांव बनाने का अभियान का प्रारंभ किया जाये, ताकि किसान भाईयों के कृषिगत कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाये। जिससे इसके उपयोग से भूमि की उर्वरकता का भी बढ़े एवं खाद तथा उर्वरक पर निर्भरता कम हो।

कृषिगत कचरे को सड़ाने के लिये खुले में रखने के बजाय जमीन में तीन फीट की गहराई तक गड्डा करके रखने से जहां कचरा शीघ्र सड़ेगा वही इसकी गुणवत्ता में वृद्धि भी होगी। केन्द्र के वैज्ञानिको ने ऑवलाझरी के सरपंच श्री देवेन्द्र मोहारे, जनपद सदस्य श्रीमति उर्मिला सौलुखे एवं अन्य कृषको की उपस्थिति में श्रमदान द्वारा कम्पोस्ट गड्डो का निर्माण किया तथा उन्हे कम्पोस्ट तैयार करने की विधि बताई गयी। इस प्रकार तैयार कम्पोस्ट खाद में केचुओं को डाल दिया जायें तो अगले 45 दिन में यह खाद केंचुआ में परिवर्तित हो जायेगी। जिसका उपयोग खेतो में करने से किसान की आय को दुगना करने में सहायता मिलेगी। क्योकि केंचुआ खाद के प्रयोग से उत्पादन में वृद्धि होगी साथ लागत में भी कमी आयेगी।

एक अनुमान के अनुसार इस तरीके के प्रयोग के पश्चात कृषको की आय में 20 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है। कार्यक्रम में ग्राम के सरपंच श्री मोहारे ने ग्रामवासियों से इस संकल्प हेतु एकजुट होने का आव्हन किया। जनपद सदस्य श्रीमति सौलेखे ने भी सभी कृषको से स्वच्छता का संकल्प लेने का आव्हन किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिको डॉ.एस.आर. धुवारे (कृषि विस्तार वैज्ञानिक), डॉ. मनीष श्रीवास्तव (पशु प्रबंधन वैज्ञानिक), डॉ. रामेश्वर अहिरवार (मृदा, वैज्ञानिक), डॉ. सुनील कुमार जाटव (पादप प्रजनन, वैज्ञानिक), डॉ. ब्रजकिशोर प्रजापति (चारा प्रबंधन, वैज्ञानिक), सतेन्द्र कुमार (मत्स्य पालन वैज्ञानिक), डॉ. हेमंत राहंगडाले (वैज्ञानिक) ने भी श्रमदान किया एवं अपने-अपने विषयों पर कृषको को सलाह प्रदान की।

कृषि विज्ञान केन्द्र बड़गांव, बालाघाट सभी कृषिकों से आव्हन करता है कि अपने आसपास परिवेश धूरा डालने की जगह गड्डे बनाकर कम्पोस्ट खाद तैयार करे। ताकि कृषि आय को दुगना करने के संकल्प को पूर्ण किया जा सके।

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