गौशाला की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित कर गोबर व गौमूत्र का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर अतिरिक्त आय का साधन विकसित करें- कलेक्टर

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छिन्दवाड़ा – (ईपत्रकार.कॉम) |जिला गौपालन एवं पशु संवर्धन समिति की बैठक आज कलेक्टर श्री जे.के. जैन की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के मिनी सभकक्ष में संपन्न हुई जिसमें जिले भर के गौपालक शामिल हुए। बैठक में पिछली बैठक की कार्यवाही के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा के दौरान बताया गया कि जिले की गौशालाओं में उपलब्ध पशुओं के भरण-पोषण हेतु प्रबंध संचालक म.प्र. गौपालन एवं पशुपालन संवर्धन द्वारा 7 लाख 80 हजार 446 रूपये प्राप्त हुए थे। यह राशि संत आशाराम गौशाला खजरी, बाहुबली जीव संस्थान मेघा सिवनी, बजरंग गौशाला जाम सांवरी, उमरी खुर्द पांढुर्णा व केशव गौशाला सिवनी पांढुर्णा को वितरित की गई जिसे उन्होंने पशु चारा के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं पर व्यय की।

कलेक्टर श्री जैन ने बैठक में कहा कि कोई भी गौशाला संचालक गौ तस्करी में पकड़ी गई गायों को लेने से इंकार नहीं करें और गौशाला की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित कर गोबर व गौमूत्र का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर अतिरिक्त आय का साधन विकसित करें। उन्होंने कहा कि सभी लोग बायोगैस यूनिट लगाकर आय के अतिरिक्त स्त्रोत प्राप्त कर सकते है। साथ ही पशु चारा के लिए ने‍पियर घास व एजोला काई के संवर्धन व उसके उपयोग से पशु चारा व भूसा में किये जाने वाले व्यय में भी कमी की जा सकती है। उन्होंने गोबर के विभिन्न उपयोग और गौमूत्र से कीटनाशक औष‍धि के साथ ही जमीन की ऊर्वरता बढाने वाले घटकों पर प्रकाश डालते हुए इसे व्यवहारिक स्तर पर अपनाकर संकल्प से सिद्धी पर जोर दिया। इस संबंध में कलेक्टर पूर्व से ही उपसंचालक पशु चिकित्सा को ऐसी ही तकनीकी अपनाकर अतिरिक्त आय सृजन के निर्देश देते रहे है।

बैठक में कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि दूध न देने वाली गायों को अनुपयोगी समझकर उन्हें उपेक्षित न करें, बल्कि उनका संरक्षण कर उनके गोबर और गौमूत्र से भी आय के स्त्रोत बनाये। जो गौपालक दूध निकालकर गायों को सड़कों पर आवारा छोड़ देते है, उनसे भी उन्होंने आग्रह किया कि वे दुर्घटना के लिए गायों को सड़कों पर आवारा न छोड़ें। बैठक के दौरान कई ऐसे निजी गौशालाओं का उदाहरण भी दिया गया जो वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन कर आय का अच्छा स्त्रोत विकसित कर चुके है जिनमें जामुनझिर, पांढुर्णा व अन्य जिलों के कुछ उदाहरण है। कलेक्टर ने कहा कि गौपालकों को ऐसी जगह का भ्रमण कर गौपालन के आधुनिक व अपशिष्ट प्रबंधन के आधुनिक तकनीक से दुगुना लाभ प्राप्त करने के उपायों को सीखना चाहिए। कलेक्टर ने विशेष रूप से कहा कि किसी काम को बेहतर ढंग से कर व सामाजिक सहभागिता से कर एक आदर्श स्थिति में पहुंचा जा सकता है।

बैठक के दौरान संत आशाराम गौशाला खजरी के प्रतिनिधि ने बताया कि उनके यहां 400 गौवंश है। पहले लकड़ी, चारा व अन्य संसाधनों में एक लाख रूपया अतिरिक्त खर्च होता था, किंतु अब गौबर व गौमूत्र से बायोगैस यूनिट व खाद से एक लाख रूपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आय होती है। उन्होंने बताया कि ने‍पियर घास व एजोला काई का संवर्धन व उसके उपयोग से पशु चारा व भूसा में की जाने वाले व्यय में कमी आई है।

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