चतुर्थ नेशनल लोक अदालत में एक हजार 512 प्रकरणों का निराकरण

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छिन्दवाड़ा – (ईपत्रकार.कॉम) |जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एल.डी.बौरासी ने आज अन्य अतिथियों के साथ स्थानीय जिला न्यायालय परिसर के ए.डी.आर.भवन में गांधी जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित कर जारी वर्ष की चतुर्थ मासिक नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस लोक अदालत में जिला न्यायालय के साथ ही सिविल न्यायालय अमरवाडा, चौरई, पांढुर्णा, परासिया, जुन्नारदेव और सौंसर में रखे गये 18 हजार 876 प्रकरणों में से एक हजार 512 प्रकरणों का निराकरण करने के साथ ही 2 करोड 25 लाख 57 हजार 512 रूपये की राशि के अवार्ड पारित किये गये जिससे 2 हजार 77 व्यक्ति लाभान्वित हुये। इसमें लंबित 2 हजार 995 प्रकरणों में से 422 और प्रि-लिटीगेशन के 15 हजार 881 प्रकरणों में से एक हजार 90 प्रकरणों का निराकरण शामिल हैं। इस अवसर पर कलेक्टर श्री जे.के.जैन, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी, विशेष न्यायाधीश श्री आर.सी.वार्ष्णेय, ए.डी.जे. श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, श्री संजीव कुमार अग्रवाल और श्री राजेश कुमार रावतकर, सी.जे.एम. श्री एम.के.त्रिपाठी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और न्यायाधीश श्री संदीप कुमार पाटिल एवं अन्य न्यायाधीशगण, उप संचालक अभियोजन श्री पी.सी.हलदार, जिला अभियोजन अधिकारी श्री समीर पाठक, नगर निगम आयुक्त श्री इच्छित गढ़पाले, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री सोमनाथ राय, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह बैस, सर्वश्री उमाशंकर श्रीवास्तव, राजकुमार मिश्रा, प्रणय नामदेव और अन्य पदाधिकारी, अधिवक्तागण, बैंक, बीमा एवं संबंधित विभागों के अधिकारी और पक्षकारगण उपस्थित थे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और न्यायाधीश श्री पाटिल ने बताया कि इस नेशनल लोक अदालत में लंबित प्रकरणों के अंतर्गत चैक बाउंस के प्रस्तुत 367 प्रकरणों में से 52 प्रकरणों का निराकरण कर 52 लाख 6 हजार 204 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 89 व्यक्ति लाभान्वित हुये। मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा के 573 प्रकरणों में से 19 प्रकरणों का निराकरण कर 24 लाख 30 हजार रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 59 व्यक्ति लाभान्वित हुये। सिविल के 265 प्रकरणों में से 29 प्रकरणों का निराकरण कर 11 लाख 50 हजार 973 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 87 व्यक्ति लाभान्वित हुये। विद्युत के 220 प्रकरणों में से 126 प्रकरणों का निराकरण कर 10 लाख 33 हजार 398 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 126 व्यक्ति लाभान्वित हुये। अन्य मामलों के 41 प्रकरणों में से 7 प्रकरणों का निराकरण कर 6 लाख 46 हजार 148 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 21 व्यक्ति लाभान्वित हुये। लोक अदालत में आपराधिक शमनीय के एक हजार 229 प्रकरणों में से 151 प्रकरणों का निराकरण कर 391 व्यक्तियों को, भू-अधिग्रहण के एक प्रकरण का निराकरण कर एक व्यक्ति को और वैवाहिक विवाद के 292 प्रकरणों में से 37 प्रकरणों का निराकरण कर 77 व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया।

इसी प्रकार प्री-लिटिगेशन के प्रकरणों के अंतर्गत बैंक वसूली के 6 हजार 201 प्रकरणों में से 280 प्रकरणों का निराकरण कर 74 लाख 17 हजार 37 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 280 व्यक्ति लाभान्वित हुये। विद्युत के 6 हजार 837 प्रकरणों में से 276 प्रकरणों का निराकरण कर 31 लाख 32 हजार रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 276 व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया। जल कर के 2 हजार 462 प्रकरणों में से 426 प्रकरणों का निराकरण कर 11 लाख 68 हजार 25 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 456 व्यक्ति लाभान्वित हुये। संपत्ति कर के 230 प्रकरणों में से 29 प्रकरणों का निराकरण कर 3 लाख 73 हजार 727 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया जिससे 26 व्यक्ति लाभान्वित हुये। लोक अदालत में वैवाहिक मामलों के 151 प्रकरणों में से 79 प्रकरणों का निराकरण कर 188 व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया। इस लोक अदालत को सफल बनाने के लिये 34 खंडपीठ गठित कर 34 पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी जिसमें 27 न्यायिक और 7 पुलिस परामर्श केन्द्र की खंडपीठ शामिल है। प्रत्येक खंडपीठ में सदस्य रखे गये और पक्षकारों की सुविधा के लिये प्रत्येक खंडपीठ में पैरालीगल वालेंटियर्स की ड्यूटी लगाई गई।

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