जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) मामले में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि हिंसा कोई भी करे, उसको सजा मिलनी चाहिए। कानून मंत्री ने वामपंथी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा में 3-4 सीटों वाले लोग समझ रहे हैं कि छात्रों से प्रयोजित विरोध करवाकर मोदी सरकार गिरा देंगे, लेकिन वे अपने मंसूबे में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे।
कानून मंत्री ने कहा, ”जिन लोगों के पास लोकसभा में एक सीट और 3-4 सीट हैं, वो लोग समझते हैं कि कभी जाधवपुर और कभी जेएनयू से प्रयोजित विरोध करवा के मोदी सरकार को गिराने की साजिश करेंगे, तो सफल नहीं होंगे।” उन्होंने वामपंथी छात्रों से पूछा, ‘आपने रजिस्ट्रेशन रूम का सर्वर क्यों तोड़ा? जो पढ़ना चाहते हैं उनको क्यों रोकते हो?’ वहीं, जेएनयू उपद्रव में लेफ्ट विंग के साथ राइट विंग के छात्रों का नाम सामने आने पर मंत्री ने कहा कि हिंसा जिसने भी की हो, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
घटना की जांच कर रहे विशेष जांच दल की कमान संभाल रहे तिर्की ने कहा कि वामपंथी छात्र विंग एआईएसए, एआईएसएफ, एसएफआई और डीएसएफ के सदस्यों ने शीतकालीन सत्र के लिए छात्रों के रजिस्ट्रेशन में बाधा डालने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि एक जनवरी से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बाधाएं पैदा होने लगीं और 5 जनवरी तक यह जारी रहा, जिसके बाद हिंसा हुई।
दरअसल, जेएनयू परिसर में हिंसा भड़कने के पांच दिन बाद दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को नौ संदिग्धों की तस्वीरें जारी की हैं। पुलिस का कहना है कि इन संदिग्धों में जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष भी शामिल हैं। डीसीपी क्राइम, जॉय तिर्की ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि नौ संदिग्धों में से चार जेएनयू के हैं। पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने हिंसक घटना के कई वीडियो से प्राप्त फुटेज का विश्लेषण करने के बाद संदिग्धों की पहचान की है।






























































