टीकमगढ़ – ईपत्रकार.कॉम |कलेक्टर श्री सौरभ कुमार सुमन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मीजल्स-रूबेला अभियान अंतर्गत जिले के निजी स्कूल संचालकों की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें सीएमएचओ डॉ. वर्षा राय, सिविल सर्जन डॉ. सी.बी. आर्या, डीआईओ डॉ. पीके माहौर, शहरी नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश गुप्ता, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, सीडीपीओ, सुपरवाईजर, निजी स्कूलों के प्राचार्य/मैनेजर एवं शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
एक भी बच्चा मीजल्स-रूबेला टीकाकरण से वंचित नहीं रहे
बैठक में श्री सुमन ने निर्देशित किया कि जिले का एक भी बच्चा मीजल्स-रूबेला टीकाकरण से वंचित नहीं रहे। उन्होंने कहा कि कहा कि जिले का हर बच्चा निरोगी हो, सभी का यह प्रयास है। उन्होंने बताया कि मीजल्स-रूबेला का टीका उच्च गुणवत्तायुक्त तथा पूर्णतः सुरक्षित है, इसलिये सभी बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिये यह टीका अनिवार्य है। यह टीका डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित है। शासकीय कार्यक्रम के अंतर्गत दिये जाने वाला टीका बाजार में दिये जाने वाले टीके की अपेक्षा अधिक गुणकारी है एवं उसका रखरखाव उचित तापमान में किया जाता है, जो प्राईवेट में संभव नहीं होता।
स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों को मीटिंग आयोजित करें
श्री सुमन ने कहा कि इस संबंध में स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों को मीटिंग आयोजित कर समझाईश दी जाये जिससे शत-प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी स्वयं अपने बच्चों को इस हेतु टीकाकरण कराने के लिये किसी एक स्कूल में लेकर जायें, जिससे अन्य बच्चों के मन में टीकाकरण के प्रति जो भ्रांतियां हैं उनको दूर किया जा सके।
कलेक्टर श्री सुमन द्वारा प्राईवेट स्कूलों के संस्थापकों को अभियान के सफल संचालन हेतु पूर्ण सहयोग करने, स्कूलों में टीचर्स पेरेंट्स मीटिंग आयोजित कर अभिभावकों को अभियान के बारे में जागरूक करने तथा स्कूल के छात्रों की बैठक आयोजित कर छात्रों को मीजल्स रूबेला बीमारी के परिणाम एवं उनसे बचाव हेतु वैक्सीन के महत्व के बारे में जानकारी देने हेतु निर्देश दिये गये।
बैठक में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. पीके माहौर द्वारा मीजल्स-रूबेला अभियान की तैयारियों एवं विभिन्न विभागों के दायित्वों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि स्कूलों में आयोजित सत्र के दौरान स्वास्थ्य दल जिसमें एक एएनएम तथा तीन मोबिलाईजर (आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्कूल टीचर्स) होंगे जो एक दिन में एक शाला में 200 बच्चों को टीकाकरण करेंगे। यदि स्कूल में 200 से अधिक छात्र संख्या होती है, तो दल संख्या बढ़ायी जायेगी। एक दिन में एक स्कूल के समस्त बच्चों का टीकाकरण किया जाना आवश्यक होगा। उसी दिन उस क्षेत्र/गांव के आंनगवाड़ी केन्द्र में दर्ज बच्चों को भी स्कूल में लाकर टीकारण कराया जायेगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों को टीका लगाकर प्रतिरक्षित किया जाये। अभियान के अंतर्गत दिये जाने वाला टीका पूर्व में दिये गये नियमित टीकाकरण के अंतर्गत दिये गये टीके के अतिरिक्त खुराक होगी यदि बच्चे को पूर्व में मीजल्स-रूबेला का टीका दिया गया है तब भी उसे अभियान के दौरान टीका लगवाना आवश्यक होगा। वर्ष 2020 तक मीजल्स के उन्मूलन एवं रूबेला/कंजेनाइटल रूबेला सिण्ड्रोम(सी.आर.एस.) कंट्रोल किया जाना राष्ट्र का लक्ष्य है।
कलेक्टर श्री सुमन ने इस अवसर पर बैठक में उपस्थित सभी को मीजल्स-रूबेला के उन्मूलन हेतु संकल्प भी दिलाया-
’’हस सभी संकल्प लेते हैं कि, जिस प्रकार टीकों के माध्यम से स्मालपाक्स, पोलिया एवं मातृ-शिशु टिटनेस बीमारी का अंत किया है, उसी प्रकार वर्ष 2019 में 9 माह से 15 वर्ष तक के हर बालक एवं बालिका को दाहिने बाजू की चमड़ी में पीड़ा रहित एम.आर. का एक टीका लगवाकर 2 जानलेवा बीमारियों, मीजल्स एवं रूबेला से, भारतवर्ष को मुक्ति दिलायेंगे।’’यह हमारा ’’पक्का इरादा’’ है, साथ ही, देशवासियों को हमारा सच्चा वादा है।
ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि वर्ष 2020 तक खसरा रोग निर्मूलन एवं रूबेला रोग नियंत्रण किया जाना है। भारतवर्ष में खसरा रोग से प्रति वर्ष 49000 बच्चों की मृत्यु हो जाती है एवं 30000 बच्चे कन्जेनाइटल रूबेला सिण्ड्रोम के साथ पैदा होते हैं जो हमेशा के लिये परिवार व समाज के लिये परेशानी पैदा करते हैं। इसकी रोकथाम हेतु भारत शासन द्वारा वर्ष 2017 से 21 राज्यों में खसरा रूबेला अभियान सफलता पूर्वक सम्पन्न कराया जाकर करीब 30 करोड़ बच्चों को टीकाकृत किया जा चुका है। मध्यप्रदेश में यह अभियान 15 जनवरी 2019 से चलाया जाना है जिसमें 9 माह से 15 वर्ष के समस्त बच्चों को खसरा-रूबेला (एम.आर.वैक्सीन) से आच्छादित किया जायेगा। यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित एवं प्रभावशील है। अभियान के दौरान दिया गया टीका पूर्व में दिये गये एम.आर. टीके की अतिरिक्त डोज होगी जो बच्चों में अतिरिक्त प्रतिरोधक क्षमता पैदा करेगी।



























































