मौसम का अजीब रुख, कश्मीर में 14 साल बाद अप्रैल में हुआ हिमपात

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राज्य में मौसम पूरी तरह बिगड़ गया है। कश्मीर में करीब 14 साल बाद अप्रैल में हिमपात हुआ। बारिश व भूस्खलन से जम्मू-श्रीनगर हाइवे बंद होने से कश्मीर का देश से सड़क संपर्क कट गया है। इससे हजारों वाहन जगह-जगह फंस गए हैं। खराब मौसम ने हवाई सेवा पर भी असर डाला और श्रीनगर एयरपोर्ट पर 10 उड़ानें रद हो गई। ट्रैक पर पानी भर जाने से बारामुला-श्रीनगर रेल सेवा को भी कुछ देर बंद करना पड़ा।

झेलम समेत सभी नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से वादी के कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रशासन ने पुलिस, सेना व आपदा प्रबंधन को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी प्रभावितों की मदद के लिए एक एकीकृत नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया है। बारामुला में एक युवक की पानी में गिरी ट्रांसमिशन लाइन से लगे करंट से और राजौरी में एक महिला की बिजली गिरने से मौत हो गई। कोकरनाग में नाले में सूमो बहने से छह लोगों को बचाया गया, जबकि दो का कोई सुराग नहीं लग पाया है।

पुंछ में नदी में जल स्तर बढ़ने से 20 लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने का काम जारी है। बारामुला में एक मस्जिद समेत पूरे राज्य में तीन दर्जन से ज्यादा घरों व इमारती ढांचों को नुकसान पहुंचा है। एक अस्थायी पुल भी बह गया है। कश्मीर में करीब 14 साल बाद अप्रैल माह में हिमपात होने से जनजीवन पटरी से उतर गया है। बिजली-पानी व संचार सेवा भी ठप होकर रह गई है। प्रशासन ने हालात को देखते हुए कश्मीर घाटी में सभी स्कूल कॉलेजों को सोमवार 10 अप्रैल तक बंद रखने का निर्देश जारी किया है। जम्मू संभाग में भी बारिश से जन-जीवन अस्त व्यस्त रहा।

बाढ़ एवं सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर हनीफ लोन ने कहा कि दक्षिण कश्मीर में संगम और श्रीनगर के राममुंशी बाग में झेलम का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।

आज से मौसम में आएगा सुधार:
श्रीनगर स्थित मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोटस ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ सुबह से कुछ कमजोर हुआ है। उच्चपर्वतीय इलाकों में बारिश नहीं हिमपात हो रहा है, इसलिए अभी बाढ़ का ज्यादा खतरा नहीं है। शुक्रवार से मौसम में सुधार नजर आने लगेगा।

कारगिल में एलओसी के साथ सटे बटालिक सेक्टर में गुरुवार को हुए हिमस्खलन में एक सैन्य चौकी बर्फ में धंस गई। चौकी में मौजूद पांच में से दो जवानों को बचा लिया गया है, तीन की तलाश जारी है।रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह चौकी एलओसी के अंतिम छोर पर स्थित है। हिमस्खलन के दौरान बर्फ के बड़े-बड़े तोदे गिरे और चौकी नीचे दब गई। सूचना मिलते ही बचाव कर्मियों का दल साजो सामान समेत मौके पर पहुंचा। दल ने खोजी कुत्तों और अत्याधुनिक सेंसर की मदद से बर्फ के नीचे दबे जवानों की तलाश शुरू की। देर शाम तक दो जवानों को बाहर निकालकर उपचार के लिए निकटवर्ती सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, तीन अन्य लापता हैं। लगातार हिमपात के कारण राहत कार्य में मुश्किल पेश आ रही है।

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