वो भूखा है जनाब उसे,कहाँ मजहब समझ आता है

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वो राम की खिचड़ी भी खाता है,

रहीम की खीर भी खाता है,

वो भूखा है जनाब उसे,

कहाँ मजहब समझ आता है।

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