योग को मजहब से नहीं जोड़ना चाहिए-सोनू निगम

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झारखण्ड की राजधानी में रहने वाली योग टीचर राफिया नाज को योग सिखाने के कारण फतवा जारी कर जान से मारने की धमकी मिली है। राफिया नाज रांची में योग सिखाती हैं और उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया है। बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम ने झारखंड की मुस्लिम योग टीचर राफिया नाज के विरोध और उनके खिलाफ जारी फतवे की निंदा की।

उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि योग मजहब से परे है। मेरी योग टीचर भी मुस्लिम है। योग को बढ़ाने वालों के खिलाफ जो फतवा निकाल रहे हैं, उन्हें सुपारी किलर की तरह सजा मिलनी चाहिए। क्योंकि उनका मकसद साफ है कि कानून को हाथ में लो और लोगों को मारो। बता दें कि स्कूली बच्चों को योग सिखाने और रामदेव के साथ स्टेज शेयर करने पर राफिया कट्टपंथियों के निशाने पर आ गईं। मुस्लिम संगठनों ने मुस्लिम योग टीचर के खिलाफ फतवा जारी किया है। उन्हें लगातार मिल रहीं धमकियों को देखते हुए सीएम रघुवर दास ने दो सिक्युरिटी गार्ड मुहैया कराए।

सोनू निगम ने वीडियो में कहा, ”मुझे लगता है योग मजहब से परे है। हर इंसान को जरूरत है, अच्छी सेहत, अच्छी मानसिक स्थिति और प्रभु से निकटता की। आज जो योग को समाज से जोड़ रहे हैं, कुछ लोग उनके खिलाफ फतवा निकाल रहे हैं। मुझे पता नहीं ऐसा क्यों हो रहा है। मेरे ख्याल से पहले फतवा को ही बैन करना चाहिए और जो लोग फतवा निकाल रहे हैं, उन्हें वो सजा मिलनी चाहिए, जो किसी सुपारी देने वाले को मिलती है। क्योंकि ये ऐसा है कि मैंने इसकी सुपारी दी है, मारो। इसका मकसद है कि कानून को हाथ में लो और लोगों को मारो।”

सोनू ने अपनी दूसरी वीडियों में कहा, ”मैंने 2004 में योग करना शुरू किया था। मेरी टीचर का नाम रूही है, जो एक मुस्लिम है। उन्होंने मुझे पूरी मेहनत और निष्ठा के साथ योग सिखाया। मैं उनके साथ रोजाना सुबह 5 से 8 बजे तक योग करता हूं। ऐसे ही मेरे पिता भी योग सीख रहे हैं। उनके टीचर का नाम कबीर है, वो भी एक मुस्लिम है। आप सोच सकते हैं कि मुस्लिम योग टीचर हमसे कितने जुड़े हुए हैं। लोगों ये समझना चाहिए कि चाहे वो हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या पारसी हों, सभी शांति और अच्छी हेल्थ चाहते हैं। इसे ईश्वरीय शक्तियां हमारे आसपास मौजूद होती हैं और हम खुद को बेहतर तरीके से लोगों से सामने प्रेजेंट कर पाते हैं।”

गौरतलब है कि प्रोफेसर बन अनाथ बच्चों की मदद करना है लक्ष्य राफिया ने कहा कि उसका लक्ष्य नेता बनना नहीं है, बल्कि एक कुशल प्रोफेसर बनकर अनाथ बच्चों की मदद करना है। योग सिखाने के पीछे भी उसका लक्ष्य अनाथ बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने और मंच देने का है।