लोया मामला: चाहे जो भी दबाव हो, कोई भी बहस नहीं रोक सकता-SC

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विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी.एच. लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्त्ताओं के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि उनपर मामला छोड़ने के लिए कथित तौर पर दबाव डाला जा रहा है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और पल्लव सिसोदिया ने कहा कि मामला छोड़ देने के लिए उनपर दबाव डाला जा रहा है। जहां दवे ने कहा कि बार काउंसलिंग ऑफ इंडिया ने मामले में पेश होने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है, वहीं सिसोदिया ने दवे पर मीडिया में एक लेख लिखकर मामले से अलग होने के लिए उनपर दबाव डालने का आरोप लगाया।

दवे मामले में बांबे लॉयर्स एसोसिएशन की तरफ से पेश हो रहे हैं। बांबे लॉयर्स एसोसिएशन ने मूल याचिका बंबई हाईकोर्ट में दायर की थी, जिसे बाद में शीर्ष अदालत को स्थानांतरित कर दिया गया। सिसोदिया महाराष्ट्र के पत्रकार बी.एस. लोन की तरफ से पेश हो रहे हैं। उन्होंने भी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की है। सुनवाई के अंतिम हिस्से में सिसोदिया ने पीठ से कहा, ‘दवे दबाव के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने खुद मीडिया में एक लेख लिखकर मामले से अलग होने के लिए मुझपर दबाव डाला है।’’ इसपर दवे ने कहा, ‘‘मैं अपने लेख पर कायम हूं। आप (सिसोदिया) पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से पेश हुए हैं और अब इस मामले में न्यायिक अधिकारी की मौत की जांच की मांग कर रहे हैं।’’ तब पीठ ने कहा, ‘‘चाहे जो भी दबाव हो, हम अपना काम करेंगे।’’ सिसोदिया ने कहा कि वह सिर्फ दवे द्वारा लिखे गए लेख को न्यायालय के ध्यान में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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